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उनकी अदा के नाम पर

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क़ाफ़िया ,रदीफ़ के तहद एक ताज़ा ग़ज़ल (इक शेर आपके नाम) की नज़र ।

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****************ग़ज़ल *****************

बेवफ़ा ने फिर किया धोक़ा वफ़ा के नाम पर।

लिख दिया फिर से वफ़ा उसने जफ़ा के नाम पर।।

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दो क़दम भी साथ चल पाया नहीं वो इश्क़ में।

धर दिया इलज़ाम उसने था हवा के नाम पर।।

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अपने हाथों की लक़ीरें देखते हम रह गये ।

वास्ता उसने दिया जो था ख़ुदा के नाम पर।।

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बारहा खाते हैं धोक़ा फिर भी करते हैं यक़ीं।

हो गई फिर से ख़ता है बस ख़ता के नाम पर।।

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हो गये हैं दर-ब-दर सब है दुआओं का असर।

दे गये वो बद-दुआ फिर से दुआ के नाम पर।।

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जानते हैं बेवफ़ा के जाल में फंस जायेंगे ।

फिरभी मिट जाते हैं उसकी हर अदा के नाम पर।।

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अब तो(अंजुम) हो गया यह उम्र भर का सिलसिला।

ज़िन्दगी लिख जो हमने दिलरुबा के नाम पर।।

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मेरी कलम से प्यासा अंजुम

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