poems

उनकी अदा के नाम पर

Posted on

क़ाफ़िया ,रदीफ़ के तहद एक ताज़ा ग़ज़ल (इक शेर आपके नाम) की नज़र ।

————————————–

****************ग़ज़ल *****************

बेवफ़ा ने फिर किया धोक़ा वफ़ा के नाम पर।

लिख दिया फिर से वफ़ा उसने जफ़ा के नाम पर।।

————————————–

दो क़दम भी साथ चल पाया नहीं वो इश्क़ में।

धर दिया इलज़ाम उसने था हवा के नाम पर।।

————————————–

अपने हाथों की लक़ीरें देखते हम रह गये ।

वास्ता उसने दिया जो था ख़ुदा के नाम पर।।

————————————–

बारहा खाते हैं धोक़ा फिर भी करते हैं यक़ीं।

हो गई फिर से ख़ता है बस ख़ता के नाम पर।।

————————————–

हो गये हैं दर-ब-दर सब है दुआओं का असर।

दे गये वो बद-दुआ फिर से दुआ के नाम पर।।

————————————–

जानते हैं बेवफ़ा के जाल में फंस जायेंगे ।

फिरभी मिट जाते हैं उसकी हर अदा के नाम पर।।

————————————–

अब तो(अंजुम) हो गया यह उम्र भर का सिलसिला।

ज़िन्दगी लिख जो हमने दिलरुबा के नाम पर।।

————————————–

मेरी कलम से प्यासा अंजुम

पतझड़ संसार

Posted on Updated on

किसी की चाहत में बर्बाद हो गए,

अपने ही खुशियों के खिलाफ हो गए

चले थे हम खुशियाँ देने सबको,

आज खुद हम अपनी खुशियों के मोहताज हो गए ।

जिंदगी न रौशन हुई , न आयी वो वक्त-ये-बहार,

हम तन्हा यूँ गुंजन करते रहे, सब चले गए हो गया पतझड़ संसार। 

शाम की धुंध क्यों आज सुबह भी कायम है

हर दिन में ते रात सी तन्हाई क्यों है

रुख तो था बस प्यार ही प्यार का,

तो ये ज़िन्दगी में आई ऐसी जुदाई क्यों है

हम तो थे हिमायत सभी के मेरे राम

हम ही लूट गए, तेरे इस वस्त्र की ऐसी सिलाई क्यों है,

ज़रा मुझ पर भी तो उपकार कर,

निकाल ले मुझे इस पतझड़ संसार से,

प्रफुल्लित होती थी बस बहार-ए-खुशबु

तो आज ऐसी बेवफाई क्यों है???